भाई का लंड बहन की चूत में

हाई दोस्तों मेरा नाम गुलशन (नाम बदला हुआ) हैं और मैं मुंबई का रहने वाला हूँ. यह बात कहते हुए मुझे थोड़ी सी शर्म और बहुत सारा गर्व हैं. यह कहानी हैं मेरी और मेरी बहन की चुदाई की. मेरी बड़ी बहन का नाम दिव्या हैं और वो कोलेज के सेकण्ड इयर में हैं. 19 साल की हैं और मैं उस से एक साल छोटा हूँ. उस दिन से पहले मैंने अपनी बहन के बारे में अभी ऐसे नहीं सोचा था. लेकिन उस दिन जो हुआ वो बहुत ही मजेदार और सेक्सी था. मेरे माँ और बाबूजी किसी की शादी के रिसेप्शन में कल्यान गए थे और वो रात को लेट आने वाले थे. घर में मैं, दिव्या और हमारी नौकरानी रीटा थे. रीटा ने शाम का खाना जल्दी बनाया और वो अपने क्वार्टर में चली गई जो किचन के पीछे पड़ता था.

दिव्या दीदी सोफे के ऊपर बैठ के टेलीविजन देख रही थी. मुझे बोर लग रहा था इसलिए मैंने सोचा की लाओ एकाद सेक्स स्टोरी पढ़ के मन बहला लूँ. अपने कमरे में जाके मैंने लैपटॉप में इसी साईट की बड़े लंड वाली स्टोरी को पढ़ा. देसी स्टोरी पढ़ के किसका लंड खड़ा नहीं होता. मेरे साथ भी ऐसा ही हुआ. मेरा लौड़ा फट से तन गया और मेरे बरमुडे को टकराने लगा. मैंने सोचा की चलो लगे हाथ मूठ भी मार लूँ ताकि खाने से पहले सब काम निपट जाएँ. मैंने बाथरूम का दरवाजा खोला और अंदर बाथटब भर लिया. गर्मी के दिन थे इसलिए मैंने ठंडा पानी ही भरा था. सौभाग्य से मैं उस दिन बाथरूम का दरवाजा बंध करना किसी तरह भूल गया. शायद हस्तमैथुन का भूत सवार था मेरे मन पे इसलिए ही मैं भूल गया था. मैंने अंदर जाके बाथटब में अपने आप को भिगोया और फिर टब की साइड वाली जगह के ऊपर बैठ गया.

बहन ने मुझे मुठ मारते हुए देखा

अपने लंड को पकड के मैंने हिलाना चालू किया; मन में वही भीमा के लंड से आंटी की चुदाई की ही बातें गूंज रही थी. मुझे पता ही नहीं चला की कब दरवाजा खुला और दिव्या दीदी अंदर आई. मैं तो वही लौड़े को मसल रहा था की दीदी की आवाज निकली, “गुलशन क्या कर रहा हैं?”

माय गॉड लौड़े लग गए मेरे तो. मैंने फट से खूंटी पे टंगे तौलिये को खिंच के लौड़े के ऊपर ढंका और बोला, “अरे कुछ नहीं दीदी, मुझे सूजन आई हैं इसलिए खुजा रहा था.”

“चुप कर गधे. मुझे इतना पता नहीं चलता की खुजाना किसे कहते हैंक्या. आज आने दे मोम को तेरी शिकायत लगानी ही पड़ेंगी.” दीदी एक ही सांस में यह सबकुछ बोल गई.

मैं सच में डर गया क्यूंकि माँ को पता चलने का मतलब हैं की वो मेरी गांड फाड़ देंगी. मैं दिव्या को मनाने की कोशिश करने लगा. मैंने कहा, “दिव्या नहीं प्लीज़ माँ को कुछ मत बताना. वो खामखा में गुस्सा करेंगी.तुम जो कहोंगी वो मैं करूँगा. प्लीज़ प्लीज़ प्लीज़.”

दिव्या थोड़ी पिगलती दिखी. वो बोली, “एक शर्त पे मैं तुम्हे छोड़ सकती हूँ. तुम मुझे अपनी लूल्ली बताओ एक बार.”

मुझे गुस्सा आ गया लूल्ली सुन के. 7 इंच के लौड़े को कैसे वो लूल्ली बोल सकती हैं. लेकिन मेरा ऊंट अभी पहाड़ के निचे था इसलिए मैं कुछ नहीं बोला. मैंने एक पल के लिए सोचा की दिव्या को भला मेरा लंड देखने की क्या जरूरत आन पड़ी थी. तभी मुझे लगा की भाई बहन की सेक्स स्टोरी की तरह ही कहीं वो मुझ से चुदना तो नहीं चाहती ना? मेरे पाँव के निचे से जमीन पहली बार खिसकी. मैं अपना तौलियां हटाऊं उसके पहले दिव्याने अपना हाथ बढ़ा के उसे हटा लिया. मेरा लंड दिव्या के आ जाने से वापिस छोटा हो गया था. दिव्या ने हाथ आगे कर के मेरे लौड़े को पकड़ा और उपर ककी और उठाया. उसके ठन्डे ठन्डे हाथ के स्पर्श से मेरे लौड़े में धीरे धीरे जान आ रही थी. दिव्या की आँखों में एक अजब चमक थी; चुदाई की चमक. तो क्या बहन की चुदाई की मर्जी थी सच में या यह मेरा सपना मात्र था. दिव्या ने लंड के सुपाड़े को पकड के उसे हिलाया.

दिव्या बोली मुझे अपना लंड दे अब

उसके बाद वो जो बोली उसे सोच के ही मेरा लंड करंट खा गया.

दिव्या: सिर्फ लंड हिलाता हैं या कभी चूत भी ली हैं किसी की.

मैं जवाब देने की स्थिति में नहीं था. दिव्या की आँखों में चुदाई की चमक बढती जा रही थी; इसका कारण शायद मेरे लंड की बढती साइज़ थी. दिव्या आगे बोली, “मुझे चोदेंगा आज तू. अपनी बहन की चुदाई करेंगा.?”

मैं अब भी कुछ नहीं बोला और दिव्या ने अपनी टी-शर्ट को ऊपर किया. पहली बार अपनी बहन को ब्रा में देखना क्या होता हैं वो काश आप को बता सकता. दिव्या की काली ब्रा e अंदर उसके मस्त गोल चुंचे देख के मुझे चुदाई की प्यास आई; और मेरे मुहं में उन चुंचो को चूस लेने के लिए पानी भी आ गया. लेकिन मैं जरा भी जल्दबाजी नहीं करना चाहता था! हो सकता हैं की यह दिव्या की चाल हो मुझे फ़साने की. लेकिन मेरा भ्रम दूर हो गया जब दिव्या अपने घुटनों e बल निचे बैठ गई और मेरे लौड़े के ऊपर अपने गुलाबी होंठो से चुम्मे देने लगी. दिव्या का यह रूप मेरे लिए बिलकुल अलग था. घर में तो वो सीधी सादी भोलीभाली लड़की थी और अभी बाथरूम के अंदर वो अपने भाई का लंड चूस रही थी. मैंने सोचा हटाओ सब और चोद दो; चूत हैं ना फिर क्या हैं.

दिव्या मेरे लंड को चुम्मे देने के साथ साथ अपने चुंचे भी मसल रही थी. मैंने सोचा की चलो गरम हो जाने दो उसे थोडा फिर मैं खेलता हूँ उसके साथ. दिव्या ट्राय कर रही थी लौड़े को पूरा मुहं में लेने के लिए लेकिन वो उसके लिए पोसिबल नहीं हो रहा था. मैंने अपने लौड़े को उसके मुहं से निकाला और लंड को उसके गालों के ऊपर ठपठपाने लगा. लौड़े से उसका थूंक निकल के गाल पर चिपक रहा था. दिव्या ने फिर से लंड को अपने मुहं में भर लिया. मैंने उसका मुहं अपने हाथो में पकड़ा और मैं उसके मुहं में झटके देने लगा. दिव्या अपने चुंचे पकड के मसल रही थी. उसका मुहं मेरे लौड़े को बड़ा मजा दे रहा था. मैंने उसके मुहं को और भी जोर जोर से चोदना चालू किया और वो भी मुहं को मेरे लौड़े के ऊपर दबा के मस्त मजा दे रही थी. तभी मेरे लंड की गर्मी निकल गई. एक एक कर के लंड ने 3-4 झटके मारे; वीर्य दिव्या के मुहं में ही निकल गया. दिव्या ने आधा वीर्य गले में उतारा और बाकी का सिंक में थूंक दिया. वो खड़ी हुई और अपनी ट्रेक पेंट उतारने लगी. वो अंदर काली पेंटी में थी. उसने पेंटी उतारी और ब्रा के हुक भी खोल बैठी. पहली बार मैंने उसकी गुलाबी चूत देखी थी. मैंने उसके पहले कामवाली की चुदाई की थी लेकिन ऐसी गुलाबी चूत मेरे लिए बिलकुल नई थी.

बहन की चूत चाटी

दिव्या ने बाथटब अ पानी निकाल दिया और वो अंदर लेट गई. उसने अपनी टाँगे बाथटब की साइड के ऊपर रख के चूत को फैला दी. वो बोली, “आजा गुलशन मेरी चूत चाट तू अब.”

मैं तो उस गुलाबी चूत को चाटने के विचार मात्र से ध्रुज रहा था. मैं दिव्या के पाँव के बिच में जा बैठा और उसकी चूत के ऊपर ऊँगली फेरने लगा. बहन की चूत मस्त गीली हुई पड़ी थी. दिव्या अपनी आँखे बंध कर के अपने होंठो को दांतों तले दबाने लगी और बोली, “जल्दी चाट ना मेरी चूत गुलशन, मुझ से अब रहा नहीं जाता हैं.”

मैंने अपने होंठो से दिव्या की चूत को एक मस्त चुम्मा दिया और फिर अपनी जबान को चूत के ऊपर घिसने लगा. दिव्या अपने चुंचे दबाने लगी और उसने अपनी टाँगे और फिर फैला दी. मैंने उसकी चूत की दरार में अपनी जीभ डाली और मैं जीभ को ऊपर निचे करने लगा. दिव्या की आह आह निकलने लगी और वो मेरे माथे को पकड के अपनी चूत के ऊपर दबाने लगी. मैं जैसे स्वर्ग में थे और किसी अप्सरा की खारी खारी चूत को चाट रहा था. दिव्या अपनी गांड को ऊपर निचे कर के अपनी चूत मेरे मुहं में घिसने लगी. दिव्या बड़ी चुदासी हुई पड़ी थी क्यूंकि उसकी चूत पानी के ऊपर पानी बहायें जा रही थी. मेरा लंड एकबार फिर से टाईट हो गया था.

दिव्या ने तभी मेरे माथे को पकड़ा और बोली, “चल गुलशन मेरे भाई मुझे चोद अब मुझ से जरा भी नहीं जा रहा हैं.”

दिव्या खड़ी हो गई और उसने बाथरूम के अंदर बने शावर कर्टेन को पकड लिया. मैंने उसकी एक टांग उठा के बाथटब के साइड वाले हेंडल पे रखवा दियां. ऐसा करने से उसकी चूत में लंड डालने की थोड़ी सी जगह बन गई. मैंने अपने सुपाड़ें को थूंक लगाया और पीछे से उसके चूत के छेद के ऊपर सेट कर दिया. दिव्या को चरमसुख मिला शायद मेरे लंड के चूत को छूने से. उसने अपने आँखे बंध ककी और वो थोडा आगे झुक गई. मैंने एक हल्का झटका दिया और अपने लंड को उसकी चूत में पेल दिया. दिव्या के मुहं से आह निकली और उसने अपने कुल्हें को बाएँ साइड से पकड़ के थोडा चौड़ा किया. ऐसा करने से शायद लौड़ा उसकी चूत को कम दर्द दे रहा था. उसने अपनी गांड को पकडे रखा और बोली, “चोद जोर जोर से मुझे गुलशन. निकाल दे मेरी चूत का पानी और फिर मुझे अपने लंड का पानी पिला दे.”

मैंने दिव्या की कमर को पकड़ा और उसकी चूत के अंदर धीरे धीरे से झटके देने लगा. दिव्या ने 1 मिनिट अपनी गांड को थामे रखा और फिर उसने हाथ आगे दिवार के उपर रख दिए. अब वो भी अपनी गांड को आगे पीछे करने लगी. मुझे बहुत ही मजा आ रहा था दिव्या की ऐसी चुदाई करने में.  दिव्या भी मस्तिया गई थी लंड चूत में ले के. वो अपनी गांड हिला हिला के चूत के अंदर लेती रही और मैं भी अपनी इस सेक्सी बहन को लंड का मजा देता रहा. दिव्या की कुछ 5-6 मिनिट ऐसी चुदाई हुई और मेरा वीर्य अब लंड के सुपाडे में आ गया था. मैंने दिव्या के कान में कहा, “मेरा निकलने वाला हैं. क्या करूँ?”

“जल्दी निकाल अपने बच्चे का ही मामा बनेंगा क्या! मेरे मुहं में निकाल दे.” दिव्या हंस के बोली.

मैंने फच से लंड निकाला दिव्या की चूत से और उसके मुहं से एक बड़ी आह निकली. मदिव्या अपने घुटनों पर वापिस जा बैठी और मैंने अपना लंड उसके मुहं के आगे हिलाना चालू कर दिया. दिव्या ने अपने मुहं को खोला और वो बेताबी से मेरे वीर्य के ढलने का वेईट कर रही थी. तभी एक पिचकारी छूटी और वीर्य टपकने लगा. मैंने लंड के नाले को दिव्या के मुहं में मोड़ा और एक एक बूंद को उसके मुहं में निकाला. दिव्या ने वीर्य को अपने मुहं में थोड़ी देर चलाया और फिर वो एक घूंट में उसे पी गई. वो कपडे पहनने लगी और बोली, “आगे भी मुझे अपने लंड का स्वाद देते रहना. मुझे पता हैं की तुमने भी बड़े मजे लिए हैं.”

मैं हंस पड़ा और हम लोग कपडे पहन के बाथरूम से बहार आये. बहार एक और बड़ा सस्पेंस हमारी राह देख रहा था? बहन की चूत में लंड देने के बाद आगे क्या हुआ वो मैं आप को अपनी अगली कहानी में बताऊंगा.

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