बबलू से चुदवाया

हाई दोस्तों, कोलेज की दहलीज पे पाँव रखने के समय हरेक जवान लड़की का एक सपना होता हैं. और यह सपना होता हैं की कोलज में उसे कोई ऐसा कन्धा मिले जिसके ऊपर सर रख के वो आराम कर सकें. कोई ऐसा मजबूत हाथ जिसे थाम के वो कोलेज के लेक्चर्स बंक कर सकें और गार्डन में टहल सकें. मैं भी कुछ ऐसी ही सोचती थी जब दो साल पहले मेरा दाखिला कोलेज में हुआ. मेरा नाम नहीं बताउंगी क्यूंकि मैं एक बड़े घर की हूँ और मेरा नाम काफी यूनिक हैं. लेकिन आप को बबलू के बारें में जरुर बताउंगी. यह कहानी हैं मेरी और बबलू की, जब मैंने उससे पहली बार चुदवाया.

कोलेज के साथी से चुदवाया

बबलू कोलेज में मेरे साथ था और मैंने उस से कोलेज के इन दो सालों में कम से कम 300 बार चुदवाया हैं. बबलू कोलेज का एक लफंगा, आवारा और गुंडा लड़का हैं लेकिन मुझे पहले से ही उसकी बोल्ड अदाएं पसंद थी. वो लड़कियों को छेड़ता और उनकी मजाक बनाता. ऐसे में उसने मुझे एक दिन अपने साथ फ्रेंडशिप के लिए पूछा और मैंने उसे मना नहीं किया. पता नहीं क्यूँ लेकिन वो मवाली में मुझे एक इंसान दीखता जो मुझे समझता था. बबलू के साथ की हर चुदाई तो मैं यहाँ नहीं लिख सकती लेकिन आज मैं पहली चुदाई की बात आप लोगों को बताउंगी. बबलू से पहली बार मैंने एक दोस्त के घर चुदवाया था. उस शाम को मेरी चूत की सिल टूटी थी. तो चलें जाते हैं उस शाम पे जब बबलू ने मेरी चूत की झिल्ली फाड़ी थी.

बबलू: डार्लिंग आज रेखा के घर पे बर्थ-डे पार्टी हैं. तुम अपनी लाल स्कर्ट में आना बहुत धांसू लगती हो उसमे. मैं: तुम तो पीछे हीपड़ गएँ हो उस लाल स्कर्ट के.

बबलू: तुम्हारी गांड इसमें मस्त दिखती हैं जानेमन, जैसे किसी आंटी की गांड.

मैंने किताबे बबलू के सर पे दे मारी और उसने मुझे गले से लगा लिया. मैंने देखा की उसकी नजरें मेरी चूंचियों में ही थी. मेरे मन में भी जैसे थोड़ी हलचल हुई. मैं भी चाहती थी की बबलू के साथ में सेक्स करूँ, लेकिन उसने आज तक कोई पहल नहीं की थी इसलिए मैं आगे नहीं बढ़ना चाहती थी. शाम हो गई और हरबार की तरह बबलू दो गली छोड़ के मुझे लेने के लिए खड़ा था. मैंने अपनी स्कूटी को अपनी दोस्त नीता के घर में पार्क की और बबलू के पीछे मुहं पे रुमाल बाँध के बैठ गई. बबलू ने बाइक फ़ास्ट चलाई और बिच बिच में हरबार की तरह उसने कुछ ब्रेक्स लगाई. मेरे हाथ उसकी जांघ पे थे और जब वो ब्रेक लगता था तब मैं अपनी चुंचियां कुछ ज्यादा ही उसके कंधो पे घिस देती थी. पुरे रस्ते में मैं अपनी चुंचियां जाने कितनी बार उसके कंधे पे दे मारी.

जैसे ही हम लोग रेखा के घर पहुंचे मैंने देखा की पार्टी का माहोल मस्त जमा हुआ था. रेखा और दूसरी लड़कियों ने काफी ड्रिंक ले रखी थी हमारे जाने से पहले ही और वो लोग मुन्नी बदनाम हुई के सोंग पे अश्लील डांस कर रही थी. मोना कभी अपनी गांड को कोलेज के ही अभिषेक के लंड पे घिस देती टी रेखा अपनी चूंचियों को जानबूझ के जोर जोर से हिला रही थी. बबलू ने मेरे सामने देखा और बोला, “देखो इन लोगों पे सेक्स का नशा चढ़ा हैं. आज कोई गधे का लंड दे तो भी यह लड़कियां दारु के नशे में ले लेंगी.”

मैंने बबलू के हाथ पे अपना हाथ देते हुए कहा, “बबलू बस एक तुम्हे ही यह नशा नहीं चढ़ता हैं.”

बबलू ने चौंक के मेरी और देखा और बोला, “क्या बात हैं तुम तो आज रोमेंटिक मुड में लग रही हो.”

मैं: मैं तो हमेंशा ऐसी ही हूँ, लेकिन तुम कभी कुछ कहते ही नहीं.

बबलू को शायद झटका लगा की मैं चुदवाने की बात कर रही थी. उसने मुझे देख के कहा, “मजाक तो नहीं कर रही ना मेरा?”

मैंने उसके हाथ को दबा के कहा, “नहीं रे.”

बबलू फिर एक ही शब्द बोला, “रुको.”

बबलू को चोदने पे मजबूर किया

वो मुझे वहीँ छोड़ के आगे गया और नाचते हुए अभिषेक को बहार निकाल के उसके कान में कुछ कहा. अभिषेक ने अपनी जेब से एक चाबी निकाली और बबलू को दी. बबलू वापस आया और मेरा हाथ पकड के घर से बहार ले आया. उसने अपनी बाइक फिर से चालु की और मैं उसके पीछे बैठ गई. अब की उसने मेरे हाथ को अपनी जांघ से उठा के अपने खड़े हुए लंड के उपर रख दिया. और अब मैं उसके लंड को चलती बाइक के ऊपर ही दबा रही थी. बबलू ने इसके पहले मुझे अपना लंड कभी दिखाया नहीं था क्यूंकि मैंने उससे कभी चुदवाया नहीं था. लेकिन आज हम दोनों ही के तनबदन में आग लगी थी. बबलू ने नुक्कड़ पे बाइक रोकी और मुझे वहीं रुकने के लिए कहा. मैंने देखा की वो मेडिकल स्टोर पे गया और एक चीज को उसने अपनी जेब में डाली. मैं समझ गई की उसने रबर की त्वचा ली हैं जिस से बच्चा आकार ना ले ले. हम लोग वापस बाइक पे चल पड़े. रस्ते में मैं बबलू के लंड को पकड के हिला रही थी. उसका लौड़ा कम से कम 8 इंच का तो था ही. मेरी चूंचियों के अंदर अजब अकड आ रही थी और मेरी चूत का पानी भी छुट रहा था.

तभी बबलू ने बाइक रोकी. बाइक से उतर के बबलू ने मुझे चुप रहने का इशारा किया. अँधेरे में उसने मेरा हाथ पकड़ा और साइड में एक छोटे से मकान का दरवाजा अपनी जेब की चाबी से खोला. अंदर जाते ही उसने दरवाजे को बंध किया और मुझे गले से लगा लिया. मैंने उसके मुहं को दोनों हाथ से लपक लिया और उसे चूमने लगी. बबलू के हाथ सीधे ही मेरे बूब्स पे आ पहुंचे और उसने उन्हें मसलना चालू कर दिया. मैं भी चूंचियों को मसलने में अब जैसे बबलू की मदद कर रही थी. चार हाथ मेरे दो बूब्स को मसलने में लगे हुए थे. बबलू ने अब मेरी शर्ट के बटन खोले और उसे उतार फेंका. अब मैं काली ब्रा और लाल स्कर्ट में थी. बब्लू ने अपने मुहं से  ब्रा के उपर से ही मुझे चूमना चालू कर दिया. उस वक्त उसका हाथ मेरी गांड पे था और वो मुझे अपनी तरफ खिंच रहा था. अब उसके हाथ और आगे बढे और गांड की दरार के ऊपर वो हाथ की उँगलियों को दबा रहा था. मुझे गुदगुदी सा लग रहा था. बबलू ने मेरे बूब्स मुहं में भरे और वो उन्हें चूसने लगा. बबलू ने मेरी गांड को अपने दोनों हाथो से फैलाया और वो छेद पे अपनी ऊँगली रगड़ने लगा. वाऊ क्या मजा था बबलू के हाथ मेरी गांड पे घिसवाने में.

बबलू ने मुझे घुटनों पे बिठाया और अपने लंड को बहार निकाला. उसने मुझे देखा और कहा, “डार्लिंग इसे अपने मुहं में ले लो, बड़ा मजा आयेंगा हम दोनों को.”

मैंने अपने मुहं को खोल के उसके मुसल लौड़े को मुहं में भरना चाहा. लेकिन अभी तो 35% लंड ही मुहं में घुसा था की मुझे लगा की मैं वोमिट कर दूंगी. उसके लौड़े से एक अलग ही सुगंध आ रही थी, शायद मूठ और मूत मिक्स हुआ पड़ा था. बबलू ने मेरे माथे को पकड़ा और लंड को जोर से मुहं में दे मारा. मैं खांसने लगी, उसके लंड को बहार निकाल के.

“क्या हुआ डार्लिंग.?” बबलू ने पूछा.

“अरे इतना बड़ा कैसे मुहं में आयेंगा मेरे.” मैंने खिन्न हो के कहा.

बबलू हंस पड़ा और बोला, “एक काम करो फिर कैंडी के जैसे इसे चाटो.”

मैंने अपनी जबान से उसके सुपाड़ें को चूसना और चाटना चालू कर दिया. बबलू की आँखे बंध हो रही थी और वो मुझे अपनी और खींचने का प्रयास कर रहा था. मैं भी उसके लंड को और मस्ती से चूस के उसे भरपूर मजे देने का प्रयास कर रही थी. कुछ  पांच मिनिट उसके लंड को चाटा था की बबलू उठा. मैंने सोचा की लाओ स्कर्ट उतार दूँ. तभी बबलू ने मेरा हाथ पकड़ा और बोला, “स्कर्ट मत उतारो, मुझे स्कर्ट के साथ ही चोदना हैं तुम्हे.”

मैं हंस पड़ी, और मनोमन मैंने अपने आप से कहा मुझे तो चुदवाना हैं बस कैसे चोदना हैं वो तुम्हारा हेडेक हैं.

लंड चूसा के बबलू ने मुझे चोदा

बबलू ने मुझे दिवार पकड के खड़ा किया और वो मेरे पीछे आ गया. उसने अब धीरे से मेरी पेंटी को हटाया और गांड और चूत के बिच की जगह पे अपनी जबान से चाटने लगा. मुझे लग रहा था की मैं स्वर्ग में थी, अह्ह्ह्हह्ह वाऊ क्या मजे हैं. बबलू ने अब धीरे से पेंटी को खिंच के मेरी चूत को खोला. वो गांड के छेद पे भी अपनी जबान घिस रहा था और चूत के छेद में भी. मैं अब जल्द से जल्द चुदवाना चाहती थी बस. बबलू उठ खड़ा हुआ और उसने अपने लंड को पकड के चूत के छेद के ऊपर सेट किया. उसका गरम गरम लंड बहुत ही मजे दे रहा था मुझे. चूत तो पहले से ही गीली हो चुकी थी मेरी. बबलू ने चुंचे हाथ पे पकडे और एक हाथ से उसने मेरी कमर पकड़ी. फिर एक झटका लगा और उसका लौड़ा मेरी चूत में 25% से भी ज्यादा घुस गया.

“आह्ह ओह ओह बबलू बहुत दर्द हो रहा हैं, आह मर गई रे, आह्ह्हह्ह्ह्ह…..!” मैं चीख पड़ी.

बबलू ने मेरे मुहं में हाथ रखा और धीरे से कान में बोला, “अभी दर्द की जगह मजा आयेंगा डार्लिंग. धीरे से बोलो अभिषेक की फूफी बगल में ही रहती हैं.”

और फिर बबलू मुझे कंधे और गले के ऊपर चूमने लगा. उसके गर्म गर्म होंठ मुझे जैसे पीड़ानाशन में काफी मदद कर रहे थे. अब उसका डंडा सच्ची में चूत में मजे दे रहा था. बबलू ने अब धीरे से मुझे पूछा, “दर्द कम हुआ तुम्हारा?”

मैंने कुछ नहीं कहा उसे लेकिन मैंने उसके गालों के ऊपर बड़े ही प्यार से हाथ फेर दिया. बबलू समझ गया की मैं अब गरम और चुदने के लिए तैयार थी. फिर तो उसे कहने की कुछ आवश्यकता ही नहीं रही. बबलू का लंड मेरी चूत के अंदर अब बबाल मचाने लगा. वो अपनी गांड को जोर जोर से आगे पीछे कर के मुझे जोर जोर से चोदने लगा. मैं भी आज जम के चुदवाना चाहती थी अपने इस मवाली बॉयफ्रेंड के पास. मैं भी अपनी गांड को जोर से हिला के उसे पुरे मजे देने लगी. बबलू के मुहं  से आह आह ओह ओह डार्लिंग, तुम्हारी चूत मस्त हैं के आवाज निकलने लगे. उसका एक एक झटका अब उसके लौड़े को चूत की गहराई में उतारने लगा और वो और भी जोर से मुझे चूत में देने लगा. बबलू ने मेरी चूंचियों को पकड के मसली और वो अब कंधे के ऊपर फिर से चूमने लगा. तभी मुझे लगा की चूत से जैसे मूत के जैसा प्रवाही निकलने लगा, जी हाँ मैं झड़ चुकी थी बबलू के लंड के ऊपर ही. बबलू ने मुझे जोर से काटा और बोला, “डार्लिंग तुम तो खाली हो गई, मैं भी तुम्हारे साथ ही झड़ना चाहता हूँ, मैं जोर से चोदुंगा अपने हाथ को दिवार से लगा दो.”

मैंने दिवार पे हाथ रखे और बबलू के दोनों हाथ मेरी गांड पे आ गए. और जैसे उसने कहा था उसकी चुदाई एकदम से तीव्र हो गई. उसका लंड अंदर से बहार और भी जोर जोर से आने जाने लगा. मैं भी उतनी ही जोर से अपनी गांड को हिलाने लगी. बबलू की साँसे बढ़ने लगी बिलकुल मेरी तरह ही. और कुछ ही देर में उसका लावा मेरी चूत की नाली में भरने लगा. उसका गरम और गाढ़ा वीर्य चूत के अंदर निकल गया. उसने एक एक बूंद चूत में निकाली और फिर लंड को बहार निकाल लिया. बबलू ने मेरी गांड पे हाथ फेरा और बोला, “चलो अब कपडे पहन के रेखा के वहां जाते हैं. केक कटने से पहले पहुंचना भी हैं.”

यह थी मेरी कहानी की मैंने पहली बार बबलू से कैसे चुदवाया. मैं आप को कैसे बताऊँ की बबलू से पहली बार चुदवाना कितना हसीन अनुभव था. उस दिन के बाद से फिर चुदाई की गाडी रुकी नहीं. बबलू हर दुसरे तीसरे दिन किसी दोस्त के रूम पे या होटल के कमरे में चुदाई का जुगाड़ कर लेता था. उसने मुझे कोलेज के तीनों साल जम के चोदा. मैं चाहती थी की उसके साथ ही शादी करूँ लेकिन सब अपने हाथ में कहाँ होता हैं…..!

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