खालूजान ने जान बनाया

सलाम दोस्तों मेरा नाम शबनम हैं और मैं मुंबई की रहने वाली हूँ. मेरा घर मलाड में हैं. यह बात तब की हैं जब मैं अपने खाला रुकसाना के वहां खार में गई थी. रुकसाना खाला पेट से थी और उनको घर के काम में दिक्कत होती थी इसलिए अम्मी ने मुझे वहां भेजा था. खालू का नाम दिलावर हैं और वो बीएम्सी में काम करते हैं. खाला तो प्रेग्नेंट थी ही खालू ने मुझे भी चोद चोद के प्रेग्नेंट बना दिया और मेरी यही दास्ताँ आज एक कहानी की शक्ल में आप लोगो को दे रही हूँ. तो चलिए जाते हैं 12 महीने पहले के वो दिन पपर जब अब्बू मुझे खाला के वहां छोड़ के वापस घर गए….!

खाला ने मुझे रूहअफज़ा पिलाया और पंखे के निचे बैठ के हम दोनों ने काफी बाते की. मेरी अम्मी मुंबई की नहीं हैं, दरअसल वो कानपूर से हैं. अम्मी की तरह खाला भी वहीँ कानपूर में ही पली बड़ी हुई और उनकी भी शादी यहाँ मुंबई में हुई. मेरी तो पैदाइश ही यहाँ की हैं और मुझे मुंबई ही अच्छा लगता हैं. पंखे के कुतुर कुतुर आवाज के निचे हम दोनों ने बाते चालू की.

मैं: खाला आप तो हमारे घर आते आते बूढी हो गई. शादी के बाद की दावत पे आई फिर तो फोन पे ही जैसे की दिन निकाले.

खा:  अरे तेरे खालू बहुत बीजी इंसान हैं. रोज कोई ना कोई कॉपरेटर के वहां काम से जाना, कुछ फिक्स नहीं होता हैं उनका. और फिर शादी के दुसरे महीने में ही तो मैं पेट से हो गई.

इतना कह के खाला खी खी हंसने लगी. खाला किसी कच्ची कली जैसे थी जब हम लोग उसकी शादी पे गए थे. और अभी वो किसी भरी हुई भाभी की तरह ताज़ी और मोटी लग रही थी. शायद खालू का पम्पिंग स्टेशन पावरफुल हैं जिसके चलते खाला की यह हालत हैं. बातों का दौर आगे चला और खाला ने मुझे बताया की खालू दिलावर थोड़े स्ट्रिक्ट हैं और उन्हें काम में सब चीज सही जगह और टाइम पे चाहियें. मैंने खाला को कहा अरे तो तुम्हारे शोहर हैं हम तो उनसे मस्ती करेंगे.

खालू की नजर की वासना

शाम को जब खालू आये तो उनकी पर्सनालिटी देखने वाली थी. सफ़ेद कुर्ता निचे बिलू जींस और मुहं में पान का गोला. होंठो के ऊपर की लाली कह रही थी की खालू 10 पान तो खाते होंगे दिन में. मुझे देख के उन्होंने हलकी सी स्माइल दी. मैं भी हंसी, खाला ने जैसे ही खालू को देखा वो जैसे की डरी डरी हो गई. मैंने खालू के लिए गोस्त रोटी लगाई और उन्होंने कपडे बदल के खाना खाया.  खाला और मैं होल में टीवी देख रहे थे, तभी खालू बहार से आये. खाना खा के वो कुछ देर बहार गए हुए थे. आते ही उन्होंने खाला को कहा, “रुकसाना मेरे पाँव में बहुत दर्द हैं जरा दबा देना तो.”

मैंने खाला की ओर देखा और सोचा की यह कहाँ से दबएँगी पाँव. मैंने खाला के पहले ही कहा, “अरे खालूजान खाला इस हालत में कहाँ दबएँगी पाँव. लाओ मैं ही दबा देती हूँ.”

खाला ने बहुत कोशिश की लेकिन मैं नहीं मानी. खाला को वही बहार के होल में छोड़ के मैंने खालू के कमरे की और रास्ता नापा. खालू अपना कुरता उतार के पलंग में गिरे. उनके बदन पे अभी सिर्फ एक बनियान और निचे पेंट थी. मैं भी 18 की तो थी ही इसलिए जानती थी की मर्द के दिल में एक चोर होता हैं जो लड़की की जवानी देख के हुंकार लगाता हैं. खालू ने अपने पांव लंबे किये और मैंने उन्हें घुटनों के निचे के भाग में दबाने लगी. मैंने उस वक्त खुले गले की कमीज़ पहनी थी और अंदर कोई ब्रा नहीं थी. खालू के पाँव दबाते दबाते मेरे चुंचे हवा में इधर उधर हो रहे थे जिन्हें मैं अपनी ओढनी से छिपाने की ट्राय कर रही थी. लेकिन वो नहीं छिप पा रहे थे, मेरी उम्र के हिसाब से मेरी चुंचिया बड़ी जो हैं. खालू की नजर बार बार वहीँ पे जा रही थी. मैंने देखा की उनकी पेंट के आगे का भाग ऊँचा हो रहा था और वो मेरी चूंचियों वाले भाग के ऊपर नजरें गड़ा के बैठे हुए थे. खालू ने मुझे कहा, “शबनम दर्द घुटनों के ऊपर ही ज्यादा हैं. अपने हाथ वही पे रख दो ना.”

अब मैं जरा सी डरी लेकिन खालू ने कहा इसलिए मैंने अपने हाथ अब ऊपर की और लिए. और मैं देखा की उनकी पेंट अब तो और भी ऊपर हो रही थी. अब वो अपनी जबान को होंठो क्ले ऊपर घुमा रहे थे, जैसे उन्हें आम देख के मुहं में पानी आ रहा था. खालू जान की नजर में वासना थी और मैं कैद में फसे हुए पंछी की तरह थी. खालू का नाग उनकी पेंट को तडपा रहा था. तभी मेरी किस्मत जागी, और खाला आ गई. मैं चैन की सांस ली. खालू खाला को देख के चौंक से गए और उन्होंने अपने आप को ठीक किया.

खाला ने मुझे कहा, “शबनम तुम अपने कमरे में जा के सो जाओ.”

मैं फट से अपने कमरे में भागी. मैं रजाई ली और सो गई. रात को करीब तिन बजे मेरी आँख खुली. पता नहीं क्यूँ लेकिन बहुत दिनों के बाद मेरी चूत में खुजली हुई थी आज. मुझे ख्यालों में खालू के खड़े हुए लंड के दीदार हो रहे थे. मेरी आत्मा जैसे मुझ कोश रही थी की खालू का खड़ा लंड छू तो लेती कम से कम एकबार. लेकिन दुसरे ही पल मैं सोचती की यह गुनाह हैं और ऐसे नहीं कर सकते. खाला को पता चला तो क्या सोचेंगी…? यह सब सोचते सोचते ही मैं अपनी इजार के नाड़े को ढीला किया. मेरा हाथ सीधा मेरी चूत पे गया. हलके हलके बालों वाली चूत को मैंने पहले खुजाया लेकिन कुछ मजा नहीं आया. मैं जब चुतर में ऊँगली को तो बहुत मजा आया. और मैं चूत में ऊँगली को अंदर बहार कर के सो गई. दुसरे दिन खालू सुबह काम पे चले गए.

दुसरे दिन फिर मसाज का प्रोग्राम

दिन भर मैं और खाला काम और बातें करती रही. शाम को खाला ने कहा की चल बाजूवाली अनीसा आंटी के वहां आना हो तो. मैंने कहा नहीं मुझे अपनी सास बहु वाली सीरियल देखनी हैं. खाला ने कहा की वो थोड़ी देर में आएँगी और वो चली गई. अब घर में सिर्फ मैं ही थी. खाला के जाने के दस मिनिट में ही खालू आयें और उन्होंने बेल बजाई. मैं दरवाजा खोला.

खालू: अरे शबनम तुम्हारी खाला कहा हैं?

मैं: वो बाजूवाली आंटी के वहां हैं, बुलाऊं?

खालू: नहीं…!

इतना कह के वो बहार मुड़े, वहां कोई उनके साथ आया था. खालू ने उसे कहा, “राने तू जा मैं कल मिलता हूँ. कल ही करेंगे अब काम मैं घर ही रुकुंगा.”

इसका मतलब खालू कुछ काम से आये थे लेकिन मुझे देख के वो घर ही रुक गए. उन्होंने दरवाजे को अंदर से बंध किया. और फिर मुझे कहा, “रात को तुमने बड़ी मस्त मसाज की थी शबनम. तुम्हारी खाला आएँगी फिर खाना खायेंगे, अगर तुम ठीक समझो तो मुझे आज भी पाँव की मसाज कर दो.”

मैं थोड़ी डर सी गई की आज कौन बचायेंगा मुझे. खालू ने कहा था इसलिए मना भी नहीं कर सकती थी. टेली बबंध कर के मैं उनके कमरे में गई. आज तो खालू ने अपनी बनियान भी उतार दी. उनका मोटा पेट बहुत ही डरावना लग रहा था. उन्होंने मुझे पलंग में बिठाया और वो तकिये के सपोर्ट से लेट गए. उन्होंने आज पहले ही कहा, “शबनम सिर्फ घुटनों के ऊपर मसाज करना.”

मैं आगे खिसकी और उनकी जांघो वाले हिस्से को मलने लगी. आज भी उनका ध्यान मेरी चूंचियों पे था. दो मिनिट मसाज की होंगी की तभी मैंने देखा की वो अपने पाँव की ऊँगली से मेरी चुंचियां छू रहे थे. पहले मैंने इसे टालने की कोशिश की लेकिन फिर वो और आगे खिसके. खालू ने मेरी निपल्स के ऊपर ऊँगली रगड़ी और मेरी चूत पानी छोड़ने लगी. मुझे गैरत आ रही थी की यह क्या हो रहा हैं. लेकिन खालू कहाँ रुकने वाले थे. उन्होंने अब अपना हाथ लम्बा किया और मेरे सर के बालों में हाथ घुमाया. मैं सहम सी गई.

मैं: खालूजान क्या कर रहे हो आप?

खालू: अरे कुछ नहीं जान….!

मैं चौंकी क्यूंकि खालू ने बड़े ही सेक्सी आवाज में यह कहा था.

खालू: तुम्हारी खाला आंटी के वहां से एक घंटे से पहले नहीं आएँगी. तब तक हम जो चाहें कर सकते हैं.

मैं: नहीं खालू यह गलत हैं, माफ़ करें खालू.

खालू: अरे डार्लिंग तुम्हे कभी ना कभी तो करना ही हैं ना, फिर मेरे साथ क्यूँ नहीं. तुम्हारी खाला थक जाती थी जब नई नई शादी हुई थी. जवानी का जोश हैं और मैं नशीले लंड वाला हूँ.

खालू ने सीधे मेरी चुंची पे हाथ रखा और उसे मसलने लगी. मैं दरवाजे के और देखने लगी. खालू समझ गए और उन्होंने उठ के दरवाजे को अंदर से बंध कर दिया. जब वो वापिस आये तो उन्होंने अपनी पेंट को रस्ते में ही खोलना चालू कर दिया. बेड के पास आये तो वो सिर्फ अपने कच्छे में थे. मैं उनके कच्छे के ऊपर उनके लिंग का आकार देख सकती थी. जैसे ब्ल्यू फिल्म्स के कालो के होते हैं ऐसा ही कुछ था. खालू ने पास आके मेरे हाथ को उठा के अपने लंड पे रख दिया. मैंने पहली बार इतने गरम लौड़े को अपने हाथ में लिया था. मैंने आह से उनकी और देखा. खालू ने मुझे कमर से पकड के उठाया और बेड में खड़ा कर दिया. फिर उन्होंने धीरे से मेरी कमीज़ को उपर उठा के उसे निकाल डाला. मैंने अपने दोनों हाथ अपनी चूंचियों के ऊपर रख दिए. खालू ने धीरे से मेरे हाथो को साइड में किया और चुंचियां देखने लगे.

खालू: अरे शबनम तेरे मम्मे तो काफी बड़े हैं, तभी वो ऐसे उछलते हैं.

खालू की इस बात का मैं क्या जवाब देती. मेरे तो पसीने छुट रही थी. मेरी जवान चूत सच में बेवफा थी. एक तरफ मैं डर रही थी और चूत की जवानी अपना पानी छोड़ रही थी. खालू ने अपने दोनों हाथों से मेरे स्तनों का मर्दन किया और फिर अपने होंठो को निपल्स के ऊपर लगा दिए. मेरे मुहं से एक लंबी आह निकल पड़ी. खालू ने मेरी गांड पे हाथ रखा और वो उसे दबाने लगे. खालू के गरम गरम होंठो से मुझे एक तरफ मजा आ रहा था. मैं अभी भी पलंग पे ही खड़ी थी. खालू ने अब धीरे से मेरे नाड़े को हाथ लगाया और उसे खिंच लिया. अब मैं कहा कहा पे हाथ रख के छिपाती. मैं नंगी हो गई थी खालू के सामने. मेरी जवान चूत, गांड और मम्मे सब तो खालू देख चुके थे. खालू ने मेरे हाथों को पीछे किया और बोले, “शबनम तुम बहुत खुबसूरत हो डार्लिंग. इतनी खूबसरत तो तुम्हारी खाला भी नहीं थी.”

इतना कह के उन्होंने अपनी एक ऊँगली को मुहं में डाल के गिला किया. फिर वो ऊँगली आ गई मेरी जवान चूत के ऊपर. मेरी चूत काफी गीली थी अंदर से. लेकिन ऊपर से अभी भी वो बहुत ही टाईट थी. खालू ने धीरे से अपनी गीली ऊँगली को अंदर किया और मेरी चूत के दाने को मसलने लगे. आह क्या मजा आ रहा था मुझे कैसे कहूँ. मैं तो पानी पानी हो चुकी थी. खालू ने अब चूत के अंदर ऊँगली डाली और वो दाने को मसलते हुए चूत के छेद की तरफ बढे. आह्ह्ह्हह्ह मेरे मुहं से ऐसी आवाज निकल रही थी. खालू ने जब चूत के अंदर ऊँगली डालने की कोशिश की तो मैं ऊपर से निचे तक हिल गई. बहुत दर्द हहुआ मुझे तो. खालूजान ने वापिस ऊँगली को थूंक से भिगोया और चूत के ऊपर ले आये. उन्होंने मुझे अपनी और झुकाया और मेरे मम्मे मुहं में ले लिए. उन्होंने एक तरफ चूत में ऊँगली डाली और दूसरी तरफ निपल्स को मुहं में ले लिए. खालू के कच्छे पे नजर पड़ी तो मैं तो डर ही गई. उनका लंड जैसे कच्छे को फाड़ के बहार आना चाहता था. खालू ने चूत में ऊँगली डाल दी और वो उसे हिलाने लगे, बिलकुल वैसे जैसे मैं कल रात किया था.

उन्होंने चूत में ऊँगली की और फिर मुझे बेड में बैठाया. अब वो खुद बेड में खड़े हुए. उनका कच्छा एकदम आगे आया हुआ था. उन्होंने कहा, “शबनम धीरे से मेरी अंडरवेर को निचे करो तो.”

मैं उनके कच्छे को साइड से पकड के निचे किया और बाप रे यह क्या हैं……खालू का लंड तो जैसे की गधे का लंड. शुध्ध काला और एकदम ताजा मोटा. खालू ने मेरी और देख के कहा, “कैसा लगा तुम्हारा छोटा यार. तुम्हारी खाला तो पगला गई थी इसे पहली बार देख के. तुम्हारे नाना की छत पे शादी के पहले दिया था मैंने उसके मुहं में इसे. आज तूम चूस के देखों.”

और सच में उन्होंने अपने लंड को हाथ से पकड में मेरे मुहं की और बढ़ाया. मैं मुहं खोला भी नहीं था की उन्होंने उसे वहां रख दिया. मुश्किल से मैं उसे मुहं के अंदर थोडा सा ले पा रही थी. खालू के लंड से अजीब बदबू आ रही थी जैसे की उन्होंने पेंट में ही मूठ मार के वीर्य को लंड पे सूखाया हों. खालू ने मेरे मुहं को दो साइड से पकड़ा और उसे फाड़ के अपने सुपाडे को मुहं में दे मारा. मुझे तो उलटी जैसा होने लगा. लेकिन खालू ने अपने लौड़े को अंदर डाल ही दिया. मैं मुश्किल से उसे संभाल पा रही थी की खालू ने अपने लौड़े के झटके मारने शरू कर दिए. मैं कुछ कर भी नहीं सकती थी क्यूंकि मेरे सर पे उनका हाथ जो था. खालू फचफच की आवाज से मेरा मुहं चोद रहे थे. उनका यह शौख पांच मिनिट चला और फिर उन्होंने मुझे बेड में लिटा दिया. अब वो मेरी टांगो के बिच में आ बैठे.

उन्होंने मुझे कहा की टाँगे जितनी फैला सकती हो फैला दो. मैं अपनी टाँगे फैला दी. खालू ने मेरे सर के निचे एक तकिया रखा और एक तकिया मेरी कमर पे. फिर वो आ गए अपने गधे जैसे लंड को हाथ पे पकड के. उनका लंड पहले से गिला थी लेकिन फिर भी उन्होंने उसके उपर बहुत सा थूंक दिया. फिर वो लंड को उन्होंने मेरी जवान चूत पे रख दिया. उन्होंने मेरी और देख के कहा, “डार्लिंग थोडा दर्द होंगा लेकिन फिर बहुत ही मजा आयेंगा.”

मेरी जवान चूत का खंडन

इतना कह के उन्होंने जोर से एक झटका दिया. मेरी चूत में जैसे मिर्ची लगा दी हो किसी ने. मेरे मुहं पे खालू का हाथ झटके के साथ ही आ गया. और उस हाथ की वजह से मेरी चीख वही मर के रह गई. खालू का लंड अभी तो आधा ही गया था मेरी जवान चूत में. मेरी चूत से खून निकल आया था क्यूंकि मैं अभी तक 100 प्रतिशत वर्जिन थी. हाँ मैं अपने हाथ से चूत में ऊँगली की थी लेकिन लंड पहला था यह. खालू ने एक मिनिट तक कोई हलचल नहीं की और दूसरी ही मिनिट वो अपनी गांड को हलके हलके हिलाने लगे. मेरी उत्तेजना धीरे धीरे बढ़ने लगी थी. अभी भी मेरी चूत के अंदर काफी दर्द था और मैं उसे बड़ी मुश्किल से सह रही थी. खालू ने अब एक और झटका मारा. अह्ह्ह अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह्ह अब की मैं अपने मुहं से आवाज को निकाल सकी.

खालू ने मेरे होंठो पे अपने होंठ रख दिए और वो मुझे चूमने लगे. फिर उनका लंड धीरे धीरे से जवान चूत के अंदर बहार दस्तक देने लगा. खालू अपने लंड को जोर जोर से चूत के अंदर बाहर करने लगे और मैं उनके झटको को कैसे सह रही थी वो मैं खुद नहीं जानती. लेकिन दो मिनिट के बाद मुझे लगा की अब मुझे मजा आ रहा था. लंड का अहसास अब जवान चूत को भा रहा था जैसे. खालूजान भी शायद यह समझ चुके थे तभी तो उन्होंने मुझे छोड़ के अपने हाथ मेरी कमर पे रख दिए. अब वो अपने डंडे को चूत के अंदर जोर जोर से चलाने लगे. अब मैं भी अपने बदन पे कंट्रोल नहीं कर पा रही थी जैसे. मेरा निचे वाला हिस्सा जैसे अपने आप हिलने लगा और मैं खालू की मदद करने लगी चुदाई करने में. खालू अब अपने लंड को और भी जोर जोर से मेरी जवान चूत में भरने लगे और मैं आह आह की आवाज से उनका साथ देने लगी. अब खालू ने मेरे मम्मे वापस मुहं में लिए और वो बिच बिच में उन्हें मसल भी रहे थे. खालू के बदन पे ढेर सा पसीना था, पंखे के निचे भी.

खालू ने मुझे और जोर से दबोचा और वो और भी जोर जोर से मुझे ठोकने लगे. मेरे बदन में भी एक अजब गर्मी थी जिसे मैं उनके लंड के ऊपर निकालना चाहती थी. खालू भी जानते थे की मैं ज्यादा टिक नहीं पाउंगी उस लंड के प्रहारों के आगे इसलिए वो मुझे बिच बिच में एकदम धीरे चोदते थे. इसके बावजूद भी मैं अपनी जवान चूत का झरना नहीं रोक पाई. मैंने खालू को जोर से अपनी बाहों में लिया और मेरी चुंचियां उनकी छाती पे टकराई. खालू ने कहा, “निकाल दे अपनी चूत का पानी मेरे लंड के ऊपर. वो भी बहुत दिन का प्यासा हैं.”

इतना कह के उन्होंने दो झटके एकदम जोर से मारे. और मेरी जवान चूत ने अपनी जवानी को निकाल दिया. चूत से बहुत सारा पानी निकला और मैं पुरे के पूरी लंड पे झड़ गई. खालू ने भी अब अपनी चुदाई को तेज किया और लंड को और भी जोर जोर से चूत के अंदर बहार करने लगे. खालू का लंड चूत की गहराई नाप के बहार आ रहा था. मैंने अपनी चूत को सख्त कर रखा था ताकि उनका माल जल्दी निकले. लेकिन खालू भी मंजे हुए खिलाड़ी थे. पूरी बीस मिनिट और चूत को ठोका फिर उन्होंने मुझे जोर से बाहों में जकड़ा और बोले, “शबनम निकाल रहा हूँ उसे एकदम गहराई में. जोर से कस लो अपनी जवान चूत को डार्लिंग.”

और उन्होंने लंड का एक डिप झटका लगा के लंड को जैसे अंदर तक पार्क कर दिया. और फिर उनके लंड से गरम गरम पानी मेरी चूत के अंदर निकल गया. खालू ने मेरे छाती को फिर से दबाया और पुरे अंदर ही झड़ गयें.

5 मिनिट लंड अंदर ही रखा उन्होंने और फिर उसे बहार निकाला. उनके लंड पे खून लगा था मेरी चूत का. खालू ने मुझे कहा, “जल्दी करो तुम्हारी खाला के आने से पहले चद्दर बदल देते हैं.”

हमने फट से कपडे पहने और उन्होंने चद्दर को वोशिंग मशीन में डाला. मैं चल भी नहीं पा रही थी. जब मैं उठ के बहार टेली वाले कमरे में जा रही थी तो खालू ने मुझे पीछे से पकड़ लिया. उनका गरम लंड मेरी गांड पे टकरा रहा था लेकिन अब उसमे जान नहीं थी.

उस शाम के बाद तो खालू मुझे अकेले में डार्लिंग और जान कह के ही बुलाते थे. खाला के सोने के बाद वो मेरे कमरे में आ जाते थे और मुझे अलग अलग पोजीशन में चोदते रहते थे. मेरी जवान चूत को उन्होंने छिल छिल के पूरी खोल डाली थी. उस वक्त मैं काफी डर गई जब मुझे लगा की मैं प्रेग्नेंट हूँ. इसका भी इंतजाम खालू ने कर दिया और एक शाम वो दो टेबलेट ले के आये. खालू ने मुझे उस रात तक चोदा जब मेरे अब्बू मुझे वापिस लेने आये खाला की डिलीवरी के बाद. मेरे आने के बाद खाला ने एक दिन फोन के कहा की खालू तुझे बड़ा याद करते हैं……..! (कहानी कैसी लगी, अच्छी कहानी को शेयर करने में कोई हर्ज नहीं हैं. हम आप की शेयर के लिए अभी से आप को थेंक्स कहते हैं.)

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