चाचू की हवस

शाम का अँधेरा था और मैं छत के ऊपर कपडे सुकाने के लिए आई थी. मैं यही रहती हूँ पिछले डेढ़ साल से. डेड के बिजनेस पार्टनर ने उन्हें धोका दिया और हमें अपना घर बेच के चाचा जी के मकान के निचे ही रहने का आशरा ढूँढना पड़ा. मैं अब 18 की हो चली हूँ और घर की इकलोती औलाद हूँ इसलिए सब की चाहिती हूँ. डेड तो उस हादसे के बाद अक्सर शराब के नशे में ही घर पे आते हैं और माँ भी पता नहीं पैसे के लिए क्या क्या जुगाड़ करती रहती हैं. मैंने तो यहाँ तक सुना हैं की डेड के ही कुछ पुराने दोस्त माँ के साथ सेक्स कर के उसे पैसे देते हैं. यही सब सोचते सोचते मैं कपड़ो से पानी निकाल के उन्हें झटक के डोरी के ऊपर डाल रही थी. तभी छत के ऊपर के दरवाजे की और से किसी के चलने की आवाज आई. मैंने मुड के देखा तो वो चाचा जी थे.

लुंगी पहनी थी उन्होंने और साथ में उनकी शराब की बोतल भी थी उन के. उन्होंने मेरी और देखा और बोले, “अरे मकसूदा बेटा इतनी लेट कपडे सुखाने आई हो क्या..?”

मैं हंस के चाचा जी को देखा और हाँ कहा. चाचा जी ने निचे अखबार बिछा के अपना आसन वही जमा दिया. मेरे चाचा का नाम अनवर हैं और वो इनकम टैक्स डिपार्टमेंट में चपरासी हैं. उन्होंने प्लास्टिक के ग्लास को निकाल के उसमे अपना जाम बनाया और जेब से एक पेकेट निकाल के नमकीन अखबार पे निकाला. मेरे कपडे सुख गए थे और मैंने अपनी बाल्टी में बचे हुए पानी को निचे उंढेल दिया. मैं अब निचे की और जाने वाली ही थी की चाचा जी बोले, “अरे मकसूदा आजा सिंग खा ले थोड़ी.”

चाचा ने सिंग चूत पे डाली

“नहीं खानी मुझे चाचा जी शुक्रिया…!” इतना कह के मैं निकलने वाली ही थी के चाचा ने मेरे हाथ को पकड के अपनी और खिंचा. मैंने सोचा की चलो एकाद दो दाने सिंग ले ही लूँ. मुझे क्या पता था की मेरी जिन्दगी की यही सब से बड़ी खुल होंगी की मैं सिंग खाने बैठ गई. और मुझे यह भी कतई ध्यान नहीं रहा की मैंने कपडे धोये थे और अंदर ब्रा नहीं पहनी थी. भीगें कपड़ो में तो चुंचियां जीनत अमान की भी दिखती हैं. मैं निचे बैठी और मैंने देखा की चाचा जी ने मेरे सीने पे ही नजर डाली. मैंने दो दाने सिंग मुहं में डाली और चाचा ने शराब के घूंट पी के शकल बनाई जैसे उनके मुहं में किसी ने मूत दिया हो. मैंने मनोमन सोचा की इतनी कडवी हैं फिर लोग पीते क्यों हैं. चाचा जी ने सिंग उठा उठा के अपने मुहं में फेंकना चालू किया. और तभी एक सिंग उड़ के मेरी गोद में आ गिरी. मैं अपना हाथ डालूं उसके पहले ही चाचा जी ने हाथ डाला और सिंग को उठा लिया. सिंग मेरी चूत के ऊपर ही थी इसलिए सिंग उठाते वक्त उनका हाथ मेरी चूत पे ही घिस गया था. मैंने सोचा की यह केवल एक संयोग ही हैं. मैंने सोचा की चलो अब मैं उठ जाऊं. लेकिन चाचा जी ने फिर मुझे हाथ पकड के बिठा दिया.

मैं निचे बैठी लेकिन अब की मेरा दिल धडकने लगा. आज घर में भी शायद हम दोनों के अलावा कोई नहीं था. माँ और चाची बहार गए थे किसी की डिलीवरी हुई थी वहाँ हॉस्पिटल में और डेड तो लेट ही आते थे. चाचा ने फिर से एक सिंग उछाली और मुझे लगा की इस बार उन्होंने उसे जानबूझ के मेरी चूंचियों के ऊपर डाली थी. दुसरे ही सेकण्ड उनका हाथ मेरे बदन पे था. उन्होंने पहले चुंची पे हाथ मारा और फिर वहीँ चूत से सिंग निकाल के खाली. मैंने उनकी लुंगी की और देखा और मैं समझ गई की मकसूदा तेरी माँ चुद गई आज तो, तेरे चाचे का नाग फन निकाल के खड़ा हुआ पड़ा हैं. मैंने चाचा की नजरों से अपनी नजरें मिलाई और वो मुझ से नजरें चुराते दिखे. मैंने फिर हिम्मत की और बाल्टी ले के खड़ी हुई. इस बार चाचा खुद भी उठा और मेरे पीछे पीछे आ गया. अभी तो 4 सीडियां उतरी थी के चाचा ने मुझे पीछे से पकड़ लिया. और क्या गरम अहसास हुआ मुझे अपनी गांड के ऊपर. वो अहसास चाचा के लंड का था जो मुझे गांड के ऊपर छू रहा था.

सीडियों पर ही मुझे दबोच लिया

मैं थोड़ी छटपटाई और चाचा के चुंगल से अपनेआप को छुड़ाने की कोशिश करने लगी. लेकिन चाचा मुझे छोड़ने के मुड में जरा भी नहीं थे. ऊपर से उन्होंने मुझे कस के पकड लिया और उनका एक हाथ सीधे मेरी कमीज में घुस गया. उन्होंने कमर के पास से मेरी कमीज में हाथ डाल के सीधे मेरे दाहिने चुंचे की निपल को पकड लिया. मैंने एक आह ली और कहा, “चाचा जी क्या कर रहे हो….!”

“कुछ नहीं जानेमन तेरी माँ की चूत लेने के बाद अब मैं तुझे चोदना चाहता हूँ बस, अगर teri माँ इतनी सेक्सी हैं तो फिर तू भी बड़ी सेक्सी ही होनी हैं.” चाचा ने चुंचे को मसलते हुए कहा.

मेरे पाँव निचे से जमीन खिसक रही थी जैसे. क्या चाचा ने माँ को चोद दिया था या वो जूठ बोल रहा था. मैं एक मिनिट के लिए सन्न सी हो गई और जब मैंने होंश संभाला तो देखा की चाचा ने मेरी कमीज को ऊपर कर के चुंची को बहार निकाल ली थी. मेरी उम्र के हिसाब से मेरी चुंचिया काफी बड़ी हैं, कम से कम 34 की तो होंगी ही. चाचा ने चुंची के ऊपर सीधे अपने मुहं को लगा लिया और वो उसे जोर जोर से चूसने लगा. मैं अब समझ गई थी की चाचा ने सब प्लान कर रखा हैं और अब उसके चुंगल से बचना मुश्किल हैं. इसलिए मैंने भी अब समर्पण करने का मन बना लिया. चाचा ने मेरे हाथो को सीडियों की दिवार से लगाया और उन्हें ऊपर कर के कमीज़ को उतार डाला. मैंने ब्रा नहीं पहनी थी इसलिए मैं ऊपर नंगी हो गई. दूसरी ही मिनिट चाचा ने मेरी इजार के नाड़े को खोल डाला. उन्होंने एक झटके से इजार यानी की सलवार को निचे कर दिया. और वो मेरी बालों वाली चूत को देखने लगा. उनके नजरों में कुत्ते वाला नशा था. चाचा ने अपने लंड को बहार निकाला और उसे हवा में हिलने लगा. उसकी साइज़ देख के तो मैं डर ही गई थी.

चाचा ने मुझे सीडियों के ऊपर ही खड़ा कर दिया उल्टा. मेरी गांड चाचा के तरफ थी और मैं खड़ी थी दिवार के सहारे. चाचे ने तभी मेरी चूत के ऊपर अपनी दो उंगलियाँ रखी. चाचा ने उँगलियों पे थूंक लगाया था शायद जिसे उसने मेरी चूत के छेद पे मला. दूसरी ही पल उसका काला और गरम लंड मेरी चूत के छेद पे था. चाचा ने एक झटका मारा और मेरे मुहं से निकल गया उईईई माँ मर गई रे….उई उई उई ओहोहोहो ओहोह आह्ह्हह्ह आह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्ह आह ओह आह्ह्हह्ह्ह्हह लेकिन चाचा रुकने वाला थोड़ी था. उसने मेरी कमर पकड के एक झटका और दे दिया. मुझे लगा जैसे की वो लंड मेरी चूत के आरपार हो के मेरे पेट में घुस गया हो. मेरे आंसू निकल के मेरी आँखों से बहार आ गए. ऐसा लग रहा था की किसी ने चूत में लोहें की सलाख को गरम कर के घुसेड दिया हो. अब चाचा अपनी गांड को हिलाने लगा और उसके लंड ने जैसे मेरे चूत की चमड़ी को पूरा छिल दिया. मुझे बहुत दर्द हो रहा था और मैं अभी भी आह ओह ओहाआआआअ अह्ह्ह्हह्ह कर के रो रही थी. चाचा अपने लंड को चूत के अंदर बहार करने में लगा हुआ था.

दो मिनिट के बाद मुझे लगा की मैं धीरे धीरे स्वस्थ हो रही हूँ. चूत के अंदर का दर्द अब धीरे धीरे कम होने लगा और मुझे जैसे अब लंड अंदर चलने से मजा आ रहा था. चाचा अपनी कमर को जोर जोर से हिला के मुझे अभी भी मस्त झटके दे रहा था. और अब तो मुझे दर्द होना बंध ही हो गया और केवल मजा ही मजा आने लगा. मैंने भी अपनी गांड को हलके हलके से आगे पीछे करना चालू किया और चाचा के लंड को इस से थोड़ी मदद मिलने लगी. चाचा अब मुझे और भी जोर जोर से पेलने लगे. फिर एक मिनिट रुक के वो बोले, “मकसूदा चलो निचे कमरे में चलते हैं, यहाँ ज्यादा देर मजा नहीं आयेंगा.”

मैंने एक हाथ में बाल्टी ली और दुसरे हाथ से अपनी सलवार कमीज उठाई. चाचा ने लुंगी को वापस निचे उतारा और वो मेरे पीछे चलने लगे. निचे पहला कमरा चाचा का ही था. मैंने कमरे में कपड़ो को निचे रखा. चाचा ने मुझे हाथ पकड के बेड में सुलाया. वो मेरी दो टांगो के बिच में आ गए और मेरी टांगो को ऊपर उठा दिया. उनका लंड एक बार फिर मेरी चूत पे था. उन्होंने अब एक झटके में ही मेरी चूत में अपना लंड भर दिया. मुझे एक झटके में लंड चूत में जाने से बहुत ही मजा आया. चाचा निचे झुका और उसने मेरी चुंचो को मुहं में बारी बारी लेना चालू कर दिया. मैंने चाचा के माथे को पकड के अपने सीने पे दबा दिया. वो अपनी जबान को निपल्स के ऊपर चला रहा था. चाचा ने अब मेरी टांगो को पकड के अपने कंधे पे रख दिया. चाचा का लौड़ा जैसे अब तो और भी अंदर तक आ रहा था और जब वो अपना लंड पूरा अंदर डाल के अपने शरीर का वजन उस पे देते थे तो बड़ा ही मजा आता था.

मेरे मुहं से आह ओह ओह आह निकल रहा था और चाचा मुझे मस्त पेलते गए. चाचा के मुहं से भी अब आह आह की आवाजें और उनकी साँसों के बढ़ने की आवाज मुझे आने लगी थी. मैं समझ गई की अब वो भी ढलने वाले हैं. चाचा ने धीरे से मेरे कान में कहा, “मकसूदा अपनी चूत को टाईट करो मेरा माल निकलने वाला हैं…! सब अंदर ले लेना मैं तुम्हे कल गोली ला के दूंगा जिस से तुम माँ ना बनो.”

चाचा की बात मानते हुए मैंने अपनी चूत को एकदम से कस लिया. चाचा ने एक पिचकारी मेरी चूत के अंदर ही मार दी. अंदर चिकना और गिला अहसास होने लगा. चाचा ने एक आखरी झटका दे के अपने बदन के सारे वजन को मेरे ऊपर ला दिया. और मैंने अपनी चूत को और भी टाईट कर दिया. चाचा ने एक हाथ से लंड को निकाला और आखिरी बूंदों को वही चूत के होंठो पे नितार डाला. फिर वो खड़े हुए और जैसे कुछ हुआ ही नहीं वैसे अपनी लुंगी निचे कर के बहार निकल गए. दो मिनिट में ही वो वापस आये, वो छत पे अपनी शराब लेने गए थे.

आते ही उन्होंने मुझे कहा, “मकसूदा अब तुम कपडे पहन लो. सच में तुम तो तुम्हारी माँ से भी बड़ी सेक्सी हो, सोच रहा हूँ की तुम माँ बेटी दोनों को एकसाथ लूँ एक रात…!”

चाचा के ऐसा बोलते ही मुझे शर्म आ गई. मैंने पाँव अपनी सलवार में डाला और उसे पहनने लगी…..!

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